Shrinkla Prathana- Niranter Prathna Me Lage Raho

Book By - Dr. Arvind Ephraim

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Dr. Arvind Ephraim

श्रृंखला प्रार्थना - निरन्तर प्रार्थना मे लगे रहो। : शक्तिशाली प्रार्थनाये चर्च निर्माण परियोजनाओं, पादरी, चर्च और राष्ट्र के लिए।

20 october 2020

ओवरव्यू

श्रृंखला प्रार्थना – निरन्तर प्रार्थना में लगे रहो

शक्तिशाली प्रार्थनाएँ: चर्च निर्माण, पादरियों, चर्च और राष्ट्र के लिए

यह पुस्तक पूरे शरीर—पूरी कलीसिया—को प्रार्थना की उस बुलाहट की याद दिलाती है जिसे स्वयं प्रभु ने दिया है।

संत ऑगस्टिन ने कहा था, “सच्ची और संपूर्ण प्रार्थना प्रेम के अलावा कुछ नहीं है।”

प्रार्थना परमेश्वर के साथ ईमानदार संवाद है—और यह केवल व्यक्तिगत क्रिया नहीं, बल्कि कलीसिया का सामूहिक दायित्व है।

बाइबल और इतिहास दोनों यह प्रमाणित करते हैं कि जब लोग प्रार्थना करते हैं—ईश्वर हस्तक्षेप करता है।

  • अय्यूब ने प्रार्थना की, और उसके मित्रों की मदद हुई—और वह स्वयं भी छुड़ाया गया।

  • मूसा ने प्रार्थना की और परमेश्वर ने इस्राएल को मिस्र से निकाला।

  • दाऊद ने प्रार्थना की और परमेश्वर ने उसके शत्रुओं को शांत कर दिया।

  • जॉन कैल्विन, मार्टिन लूथर, जॉन नॉक्स—इन सबके द्वारा प्रार्थना ने राष्ट्रों को बदल दिया।

  • हडसन टेलर ने प्रार्थना की और चीन सुसमाचार के लिए खुल गया।

  • विलियम कैरी ने प्रार्थना की और भारत के लिए बाइबल 30+ भाषाओं में अनुवादित हुई।

आज परमेश्वर आपसे और आपकी कलीसिया से यही अपेक्षा कर रहा है—प्रार्थना करो।

इतिहास बदला है जब लोगों ने प्रार्थना की, और आज भी बदलेगा जब कलीसिया अपने घुटनों पर लौटेगी।

चुनौतियाँ और तरीका

आज बहुत-सी कलीसियाओं में व्यक्तिगत प्रार्थना तो है,

पर सामूहिक प्रार्थना कमजोर, बिखरी हुई, या नियमित नहीं होती।

  • पादरी अकेले बोझ उठाते हैं

  • विश्वासियों में एकता की कमी होती है

  • चर्च निर्माण और मंत्रालय परियोजनाओं में रुकावट आती है

  • आत्मिक युद्ध में कमजोरी दिखाई देती है

  • राष्ट्र के लिए प्रार्थना का बोझ उठाया नहीं जाता

डॉ. एफ्राइम इन चुनौतियों को बाइबल और इतिहास दोनों से जोड़कर समझाते हैं:

  • कैसे श्रृंखला प्रार्थना (Chain Prayer) कलीसिया को जागृत करती है

  • कैसे प्रार्थना पादरियों और नेताओं पर आत्मिक ढाल बनती है

  • कैसे प्रार्थना से निर्माण परियोजनाएँ आगे बढ़ती हैं

  • कैसे सामूहिक प्रार्थना चर्च को एकता, सामर्थ और दिशा देती है

  • कैसे प्रार्थना राष्ट्रों को प्रभावित करती है

  • कैसे परमेश्वर तभी चलता है जब कलीसिया पहले घुटनों पर आती है

यह पुस्तक केवल सिखाती नहीं—कलीसिया को पुनः प्रार्थना के जीवन में खड़ा करती है।


परिणाम

इस पुस्तक को अपनाने पर आपकी कलीसिया:

  • एक मजबूत और निरंतर प्रार्थना संस्कृति स्थापित करेगी

  • पादरियों और नेताओं के लिए शक्तिशाली कवरिंग उठेगी

  • चर्च निर्माण और मंत्रालय परियोजनाओं में अलौकिक प्रगति देखेगी

  • राष्ट्र के लिए प्रार्थना करने वाली सामूहिक सेना खड़ी करेगी

  • विश्वासियों में एकता, संवेदनशीलता और आत्मिक जागृति बढ़ेगी

  • “निरन्तर प्रार्थना करो” (1 थिस्स. 5:17) की आज्ञा का पालन आसानी से करेगी

  • परमेश्वर की उपस्थिति और दिशा का अनुभव सामूहिक रूप से करेगी

अंततः, यह पुस्तक हर कलीसिया को वही बनने में मदद करती है जो यीशु ने घोषित किया:

“मेरा घर सभी राष्ट्रों के लिए प्रार्थना का घर कहलाएगा।”

प्रार्थना करें—और देखें कि परमेश्वर आपकी कलीसिया, आपके शहर, और आपके राष्ट्र में क्या करेगा।

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